पर्वतीय पर्यटन को बढ़ावा: केंद्र की योजनाओं में उत्तराखंड को मिली अहम जगह

देहरादून।

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा सदन में पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से सवाल किया है कि क्या देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पर्वतीय पर्यटन परिपथों का विकास करने का प्रस्ताव है? इसके अलावा विकास के लिए प्रारंभ में पांच राज्यों की पहचान की गई है क्या उत्तराखंड को भी उसे सूची में शामिल किया गया है और इन राज्यों के लिए स्वीकृत तथा जारी की गई निधि और विकास कार्य का ब्यौरा दिया जाना चाहिए।

भट्ट द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया है कि पर्यटन स्थलों और उत्पादों का विकास मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा किया जाता है। तथापि, पर्यटन मंत्रालय पहाड़ी क्षेत्र में स्थित परियोजनाओं सहित संपूर्ण देश में पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने हेतु पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए अपनी योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके प्रयासों को संपूरित करता है।

मंत्रालय ने हिमालयन थीम सहित पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र को शामिल करते हुए चिह्नित विषयगत परिपथों के तहत पर्यटन अवसंरचना के विकास के विचार के साथ वर्ष 2014-15 में अपनी ‘स्वदेश दर्शन योजना’ की शुरुआत की और देश के भीतर 76 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की।

इस योजना को सतत और उत्तरदायी पर्यटक गंतव्य के विकास के उद्देश्य के साथ ‘स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0)’ के नाम से नया रूप दिया गया है और मंत्रालय ने इस पहल के तहत देश में 53 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, मंत्रालय ने ‘तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद)’ और ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी)’ नामक स्वदेश दर्शन योजना की एक उप योजना के अंतर्गत भी परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है।

इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने ‘पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता वैश्विक पैमाने पर प्रतिष्ठित पर्यटक केदो का विकास’ योजना के तहत देश में 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपए की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका प्राथमिक उ‌द्देश्य देश में समग्र रूप से प्रतिष्ठित पर्यटक केंद्रों का विकास करना है।

भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 की अपनी बजट घोषणा में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू एवं कश्मीर तथा पूर्वी घाट में अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में पौढ़ीगई मलाई में पर्वतीय ट्रेल्स के विकास के लिए और विश्व स्तरीय ट्रैकिंग एवं हाइकिंग का अनुभव प्रदान करने के क्षेत्र में भारत की क्षमता और अवसर को भी समझा है।

उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में एसडी, एसडी 2.0, सीबीडीडी, एसएएससीआई और प्रशाद के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का ब्योरा अनुबंध में दिया गया है।

इसके अलावा पर्यटन मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में भी कई विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इको परिपथ के लिए उत्तराखंड के टिहरी झील और निकटवर्ती क्षेत्रों का नए गंतव्य के रूप में विकास के लिए इको-पर्यटन, एडवेंचर स्पोर्ट्स और संबद्ध पर्यटन संबंधी अवसंरचना का एकीकृत विकास जिला टिहरी 69.17 करोड़ दिया गया है। चंपावत में टी गार्डन एक्सपीरियंस 19.89 करोड़,

पिथौरागढ़, गुंजी में ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर एक्सपीरियंस के लिए 17.86 करोड रुपए जारी किया गया है, इसके अलावा जादूंग (जीवंत ग्राम जादुंग उत्सव मैदान, जादूंग कार्यक्रम) का विकास 4.99 करोड़, कैचीधाम परिसर का विकास के लिए 17.60 करोड रुपए जारी किया गया है। माना गांव (जीवंत ग्राम माना हाट) के लिए 4.99 करोड रुपए जारी किया गया है। इसी प्रकाश प्रतिष्ठित शहर ऋषिकेशः ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन के लिए 100 करोड रुपए जारी किया गया है।

इसी प्रकार केदारनाथ के विकास के लिए 34.77 करोड़ रूपया, बद्रीनाथ धाम तीर्थ यात्रा सुविधा के लिए 56.15 करोड़ रूपया जारी किया गया है। गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थ यात्रा सुविधाओं के लिए 54.56 करोड़ रूपया जारी किया गया है।

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